Wednesday, 16 May 2012

518_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जितने जन्म-मरण हो रहे हैं वे प्रज्ञा के अपराध से हो रहे हैं। अतः प्रज्ञा को दैवी सम्पदा करके यहीं मुक्ति का अनुभव करो।"
 Pujya Asharam Ji Bapu
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