Wednesday, 5 December 2012

949_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

"हे रामजी ! फूल और पत्ते को मसलने में देर है, अपने स्वरूप को देखने में क्या देर है ?"
 (श्री वशिष्ठजी महाराज)
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