Thursday, 4 October 2012

813_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



यह विश्व सब है आत्म ही, इस भाँति से जो जानता।

यश वेद उसका गा रहे, प्रारब्धवश वह बर्तता॥

ऐसे विवेकी सन्त को, न निषेध है न विधान है।

सुख दुःख दोनों एक से, सब हानि-लाभ समान है॥

कोई न उसका शत्रु है, कोई न उसका मित्र है।

कल्याण सबका चाहता है, सर्व का सन्मित्र है॥

सब देश उसको एक से, बस्ती भले सुनसान है।

भोला ! उसे फिर भय कहाँ, सब हानि-लाभ समान है॥
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