Friday, 9 November 2012

902_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

'ज्ञानवान आत्मपद को पाकर आनंदित होता है और वह आनंद कभी दूर नहीं होता, क्योंकि उसको उस आनंद के आगे अष्टसिद्धियाँ तृण के समान लगती हैं।
 -Pujya Asharam Ji Bapu
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