Thursday, 28 June 2012

638_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

 वृति यदि आत्मस्वरूप में लीन होती है तो उसे सत्संग, स्वाध्याय या अन्य किसी भी काम के लिये बाहर नहीं लाना चहिये
 Pujya Asharam Ji Bapu
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