Saturday, 25 October 2014

1268_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



~~~~ प्राप्ति और प्रतीति ~~~~

प्रतीति होती है माया में और प्राप्ति होती है अपने परब्रह्म परमात्मा-स्वभाव की। प्राप्त होने वाली एक ही चीज है, प्राप्त होने वाला एक ही तत्त्व है और वह है परमात्म-तत्त्व। उसकी ही केवल प्राप्ति होती है।प्रतीति होती है वृत्तियों से।जो बाहर से मिलेगा, वह सब प्रतीति मात्र होगा।जैसे स्वप्न की चीजों को साथ में लेकर आदमी जाग नहीं सकता, ऐसे ही प्रतीति को सच्चा मानकर परमात्म-तत्त्व में जाग नहीं सकता।

 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
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