Wednesday, 11 July 2012

666_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मेरा रोम-रोम संतों की, गुरू की कृपा और करूणा से पवित्र हो रहा है। आनन्दोऽहम्..... शान्तोऽहम्..... शुद्धोऽहम्..... निर्विकल्पोऽहम्.... निराकारोऽहम्। मेरा चित्त प्रसन्न हो रहा है।
 Pujya Asharam Ji Bapu
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