Monday, 14 April 2014

1191_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



जितना-जितना यज्ञबुद्धि से कर्म होता है उतना-उतना कर्त्ता अपने आत्म-स्वभाव में जगता जाता है।

स्वार्थपूर्वक कर्म करने से तो अल्प चीज मिलती है जबकि निःस्वार्थ होकर कर्म करने से अनन्त परमात्मा मिलता है।
 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
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