Friday, 18 May 2012

527_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

"अपने आत्मदेव से अपरिचित होने के कारण ही तुम अपने को दीन-हीन और दुःखी मानते हो। इसलिए अपनी आत्म-महिमा में जाग जाओ। 
 Pujya Asharam Ji Bapu

526_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

एक घण्टा काम किया। फिर एक दो मिनट के लिए आ जाओ इन विचारों में किः 'अब तक जो कुछ किया, जो कुछ लिया, दिया, खाया, पिया, हँसे, रोये,  जो कुछ हुआ सब सपना है.... केवल अन्तर्यामी राम अपना है। हरि ॐ तत्सत्.... और सब गपशप।'
 Pujya Asharam Ji Bapu 

Thursday, 17 May 2012

525_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जो लोग रूचि के अनुसार सेवा करना चाहते हैं, उनके जीवन मे बरकत नहीं आती। किन्तु जो आवश्यकता के अनुसार सेवा करते हैं, उनकी सेवा रूचि मिटाकर योग बन जाती है। पतिव्रता स्त्री जंगल में नहीं जाती, गुफा में नहीं बैठती। वह अपनी रूचि पति की सेवा में लगा देती है। उसकी अपनी रूचि बचती ही नहीं है। अतः उसका चित्त स्वयमेव योग में आ जाता है। वह जो बोलती है, ऐसा प्रकृति करने लगती है।
Pujya Asharam Ji Bapu 

524_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


संसार का तट वैराग्य है। विवेक पैदा होते ही वैराग्य का जन्म होता है। जिसके जीवन में वैराग्यरूपी धन आ गया है वह धन्य है।

Pujya Asharam Ji Bapu

523_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

विघ्न, बाधाएँ, दुःख, संघर्ष, विरोध आते हैं वे तुम्हारी भीतर की शक्ति जगाने कि लिए आते है। जिस पेड़ ने आँधी-तूफान नहीं सहे उस पेड़ की जड़ें जमीन के भीतर मजबूत नहीं होंगी। जिस पेड़ ने जितने अधिक आँधी तूफान सहे और खड़ा रहा है उतनी ही उसकी नींव मजबूत है। ऐसे ही दुःख, अपमान, विरोध आयें तो ईश्वर का सहारा लेकर अपने ज्ञान की नींव मजबूत करते जाना चाहिए। दुःख, विघ्न, बाधाएँ इसलिए आती हैं कि तुम्हारे ज्ञान की जड़ें गहरी जायें। लेकिन हम लोग डर जाते है। ज्ञान के मूल को उखाड़ देते हैं।

Pujya Asharam Ji Bapu

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