Friday, 18 May 2012
Thursday, 17 May 2012
525_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU
जो लोग
रूचि के
अनुसार सेवा
करना चाहते
हैं, उनके
जीवन मे बरकत
नहीं आती।
किन्तु जो
आवश्यकता के
अनुसार सेवा
करते हैं,
उनकी सेवा
रूचि मिटाकर
योग बन जाती
है। पतिव्रता
स्त्री जंगल में
नहीं जाती,
गुफा में नहीं
बैठती। वह
अपनी रूचि पति
की सेवा में
लगा देती है।
उसकी अपनी
रूचि बचती ही
नहीं है। अतः
उसका चित्त
स्वयमेव योग में
आ जाता है। वह
जो बोलती है,
ऐसा प्रकृति
करने लगती है।
Pujya Asharam Ji Bapu
Pujya Asharam Ji Bapu
523_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU
विघ्न,
बाधाएँ, दुःख,
संघर्ष, विरोध
आते हैं वे तुम्हारी
भीतर की शक्ति
जगाने कि लिए
आते है। जिस
पेड़ ने
आँधी-तूफान
नहीं सहे उस
पेड़ की जड़ें
जमीन के भीतर
मजबूत नहीं
होंगी। जिस
पेड़ ने जितने
अधिक आँधी
तूफान सहे और
खड़ा रहा है
उतनी ही उसकी
नींव मजबूत है।
ऐसे ही दुःख,
अपमान, विरोध
आयें तो ईश्वर
का सहारा लेकर
अपने ज्ञान की
नींव मजबूत
करते जाना
चाहिए। दुःख,
विघ्न, बाधाएँ
इसलिए आती हैं
कि तुम्हारे
ज्ञान की
जड़ें गहरी
जायें। लेकिन
हम लोग डर
जाते है।
ज्ञान के मूल
को उखाड़ देते
हैं।
Pujya Asharam Ji Bapu
Pujya Asharam Ji Bapu
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