Tuesday, 10 July 2012

663_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सुख का रहस्य यह है : आप ज्यों-ज्यों पदार्थों को खोजते-फिरते हो, त्यों-त्यों उनको खोते जाते हो | आप जितने कामना से परे होते हो, उतने आवश्यकताओं से भी परे हो जाते हो और पदार्थ भी आपका पीछा करते हुए आते हैं
Pujya Asharam Ji Bapu

Monday, 9 July 2012

662_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

  जब बुद्धि एवं हृदय एक हो जाते हैं तब सारा जीवन साधना बन जाता है |
 When the heart and the intellect work in harmony, sadhana becomes a way of life.
 Pujya Asharam Ji Bapu

661_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

 प्रेमी साधक आगे-पीछे का चिन्तन नहीं करता | वह न तो किसी आशंका से भयभीत होता है और न वर्त्तमान परिस्थिति में प्रेमास्पद में प्रीति के सिवाय अन्य कहीं आराम पाता है |
Pujya Asharam Ji Bapu

660_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जैसे बालक प्रतिबिम्ब के आश्रयभूत दर्पण की ओर ध्यान देकर प्रतिबिम्ब के साथ खेलता है, जैसे पामर लोग यह समग्र स्थूल प्रपंच के आश्रयभूत आकाश की ओर ध्यान देकर केवल स्थूल प्रपंच की ओर ध्यान देते हैं, वैसे ही नाम-रूप के भक्त, स्थूल दृष्टि के लोग अपने दुर्भाग्य के कारण समग्र संसार के आश्रय सच्चिदानन्द परमात्मा का ध्यान करके संसार के पीछे पागल होकर भटकते रहते हैं |

659_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जब आपने व्यक्तित्व विषयक विचारों का सर्वथा त्याग कर दिया जाता है तब उसके समान अन्य कोई सुख नहीं, उसके समान श्रेष्ठ अन्य कोई अवस्था नहीं
Pujya Asharam Ji Bapu
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