Thursday, 17 May 2012

522_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जो तुम्हें शरीर से, मन से, बुद्धि से दुर्बल बनाये वह पाप है। पुण्य हमेशा बलप्रद होता है। सत्य हमेशा बलप्रद होता है। तन से, मन से, बुद्धि से और धन से जो तुम्हें खोखला करे वह राक्षस है। जो तुम्हें तन-मन-बुद्धि से महान् बनायें वे संत हैं।
 Pujya Asharam Ji Bapu

Wednesday, 16 May 2012

521_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिस प्रकार धुआँ सफेद मकान को काला कर देता है, उसी प्रकार विषय-विकार एवं कुसंग नेक व्यक्ति का भी पतन कर देते है।
'सत्संग तारे, कुसंग डुबोवे।'
जैसे हरी लता पर बैठने वाला कीड़ा लता की भाँति हरे रंग का हो जाता है, उसी प्रकार विषय-विकार एवं कुसंग से मन मलिन हो जाता है। इसलिए विषय-विकारों और कुसंग से बचने के लिए संतों का संग अधिकाधिक करना चाहिए।
 Pujya Asharam Ji Bapu

520_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

एक सतशिष्य के लिए उसके सदगुरु की प्रसन्नता से
बड़ी चीज संसार में और क्या हो सकती है ..








Pujya Asharam Ji Bapu

519_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

कपड़ा बिगड़ जाये तो ज्यादा चिन्ता नहीं, दाल बिगड़ जाये तो बहुत फिकर नहीं, रूपया बिगड़ जाये तो ज्यादा फिकर नहीं लेकिन अपना दिल मत बिगड़ने देना। क्योंकि इस दिल में दिलबर परमात्मा स्वयं विराजते हैं। 
 Pujya Asharam Ji Bapu

518_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जितने जन्म-मरण हो रहे हैं वे प्रज्ञा के अपराध से हो रहे हैं। अतः प्रज्ञा को दैवी सम्पदा करके यहीं मुक्ति का अनुभव करो।"
 Pujya Asharam Ji Bapu
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