Sunday, 3 June 2012

576_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

क्रिया में बन्धन नहीं होता, क्रिया के भाव में बन्धन और मुक्ति निर्भर है। कर्म में बन्धन और मुक्ति नहीं, कर्त्ता के भाव में बन्धन और मुक्ति है। कर्त्ता किस भाव से कर्म कर रहा है ? राग से प्रेरित होकर कर रहा है ? द्वेष से प्रेरित होकर कर रहा है ? वासना से प्रेरित होकर कर रहा है ? .....कि परमात्मा-स्नेह से कर रहा है ?
Pujya Asharam Ji Bapu 

Saturday, 2 June 2012

575_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जो मनुष्य निष्काम कर्म करता है उसे आत्मा में प्रीति होती है, उसे संसार से वैराग्य उपजता है और वैराग्य की अग्नि से उसके सारे पाप तथा कुसंस्कार जल जाते हैं.
Pujya Asharam Ji Bapu

Friday, 1 June 2012

574_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिनके चित्त में राग, द्वेष और मोह की जगह पर सत्य की प्यास है उनके चित्त में आसक्ति का तेल सूख जाता है। आसक्ति का तेल सूख जाता है तो वासना का दीया बुझ जाता है। वासना का दीया बुझते ही आत्मज्ञान का दीया जगमगा उठता है। 
Pujya Asharam Ji Bapu 

573_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

लड़का सोचे किः 'पत्नी मिल जाय तो अकेलापन मिटे।' लड़की सोचे किः 'पति मिल जाय तो अकेलापन मिटे।' नहीं.... जो लोग समझ से रहित हैं, विवेक विचार से रहित हैं उन नादानों को जीवन में अकेलापन खटकता है। वरना, जिनके पास समझ है वे सौभाग्यशाली साधक अपने को एकदम खाली, एकदम अकेला, रूखा महसूस नहीं करते। वे अपने साथ परम चेतना का अस्तित्व महसूस करते हैं, ईश्वर के सान्निध्य की भावना करके तृप्ति-सुख भोगते हैं।
Pujya Asharam Ji Bapu 

572_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

हम अपने साथ बुरा करना नहीं चाहते लेकिन हम वही प्रवृत्ति करते रहते हैं जिससे हमारा अहित होता है। हम वे ही पदार्थ चाहते हैं जिससे हमारा ज्ञान दबा रहता है। हम वे ही सुविधाएँ चाहते हैं जिससे हमारा मन दुर्बल हो जाता है..
Pujya Asharam Ji Bapu
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