Saturday, 14 May 2016

1444_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जैसे स्वप्न-जगत जाग्रत होने के बाद मिथ्या लगता है वैसे ही यह जाग्रत जगत अपने आत्मदेव को जानने से मिथ्या हो जाता है। जिसकी सत्ता लेकर यह जगत् बना है अथवा भासमान हो रहा है उस आत्मा को जान लेने से मनुष्य जीवन्मुक्त हो जाता है।गुरुदेव जो देना चाहते हैं वह कोई ऐरा-गैरा पदार्थ टिक नहीं सकता है। इसलिए सदगुरु अपने प्यारे शिष्य को चोट मार मारकर मजबूत बनाते हैं, कसौटियों में कसकर योग्य बनाते हैं।प्रभु.....तु मेरा और में तेरा हु.ॐ नमो भगवते वासुदेवाय.........

Wednesday, 11 May 2016

1443_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

" हे पार्थ! यह नियम है कि परमेश्वर के ध्यान के अभ्यासरूप से युक्त, दूसरी ओर न जाने वाले चित्त से निरंतर चिंतन
करता हुआ मनुष्य परम प्रकाशरूप उस दिव्य पुरुष को अर्थात परमेश्वर को ही प्राप्त होता है। "



-श्रीमद्भगवद्गीता


Tuesday, 10 May 2016

1442_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

महापुरुष का आश्रय प्राप्त करने वाला मनुष्य सचमुच परम सदभागी है। सदगुरु की गोद में पूर्ण श्रद्धा से अपना अहं रूपी मस्तक रखकर निश्चिंत होकर विश्राम पाने वाले सत्शिष्य का लौकिक एवं आध्यात्मिक मार्ग तेजोमय हो जाता है। सदगुरु में परमात्मा का अनन्त सामर्थ्य होता है। उनके परम पावन देह को छूकर आने वाली वायु भी जीव के अनन्त जन्मों के पापों का निवारण करके क्षण मात्र में उसको आह्लादित कर सकती है तो उनके श्री चरणों में श्रद्धा-भक्ति से समर्पित होने वाले सत्शिष्य के कल्याण में क्या कमी रहेगी ?

- गुरु भक्तियोग -

Sunday, 8 May 2016

1441_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जो मृत्यु के बाद भी तुम्हारे साथ रहेगा उस आत्मा का ज्ञान कर प्राप्त लो…जीवन लाचार मोहताज हो जाये उसके पहले जीवन मे परमात्म सुख की पूंजी इकठ्ठी कर लो…।

कर सत्संग अभी से प्यारे नही तो फिर पछताना है
 खिला पिला के देह बढाई वो भी अग्नि मे जलाना है…
कर सत्संग अभी से प्यारे नही तो फिर पछताना है॥

Saturday, 7 May 2016

1440_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

~~~निश्चिन्त जीवन ~~~

निश्चय रखना चाहिये कि संसार से हमें जाना अवश्य है और सब कुछ यहीं छोड़ कर जाना होगा ; साथ में कुछ नहीं जायगा यह भी निश्चित है। जब साथ में कुछ ले नहीं जाना है तो जब तक यहाँ रहो निश्चिन्तता से रहो। व्यर्थ की चिन्तायें बना कर अशान्ति मत भोगो।

  -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
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