Wednesday, 5 December 2012

950_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

गुरु की
सीख माने वह शिष्य है।
अपने मन में जो आता है, वह तो
अज्ञानी, पामर, कुत्ता, गधा भी
युगों से करता आया है। आप तो
गुरुमुख बनिये,
शिष्य बनिये।

-Pujya Asharam Ji Bapu

949_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

"हे रामजी ! फूल और पत्ते को मसलने में देर है, अपने स्वरूप को देखने में क्या देर है ?"
 (श्री वशिष्ठजी महाराज)

Tuesday, 4 December 2012

948_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU




सामवेद का छान्दोग्य उपनिषद् कहता है कि जिस आनंद को तू खोज रहा है वह आनंद तू ही है। तत्त्वमसि। वह तू है। तू पहले आनंदस्वरूप आत्मा था अथवा भविष्य में होगा ऐसी बात नहीं, अभी भी तू वही है।
 -Pujya Asharam Ji Bapu

947_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

शमा जलती है परवानों को आमंत्रण नहीं देती। परवाने अपने आप आ जाते हैं। ऐसे ही तुम्हारा जीवन अगर परहित के लिए खर्च होता है तो तुम्हारे शरीर रूपी साधन के लिए आवश्यकताएँ, सुविधाएँ अपने आप आ जाती हैं। लोग नहीं देंगे तो लोकेश्वर उनको प्रेरित करके तुम्हारी आवश्यकताएँ हाजिर कर देंगे।
जिसने बाँटा उसने पाया। जिसने सँभाला उसने गँवाया।
 -Pujya Asharam Ji Bapu

Monday, 3 December 2012

946_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

शरीर की आवश्यकता पूरी करने के लिए पुरूषार्थ करना हाथ-पैर चलाना, काम करना, इसकी मनाही नहीं है। लेकिन इसके पीछे अन्धी दौड़ लगाकर अपनी चिन्तनशक्ति नष्ट कर देना यह बहुत हानिकारक है।
 -Pujya Asharam Ji Bapu
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