भौतिक पदार्थों को सत्य समझना, उनमें आसक्ति रखना, दुख-दर्द व चिंताओं को आमंत्रण देने के समान है । अतः बाह्य नाम-रूप पर अपनी शक्ति व समय को नष्ट करना यह बड़ी गलती है ।
Pujya Asharam Ji Bapu
जिसकी पक्की निष्ठा है कि ङ्कमैं आत्मा हूँ...ङ्क उसके लिये ऐसी कौन सी ग्रंथि है जो खुल न सके? ऐसी कोई ताकत नहीं जो उसके विरुद्ध जा सके ।
Pujya Asharam Ji Bapu
इस सम्पूर्ण जगत को पानी के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर जानकर तुम आत्मा में स्थिर हो जाओ । तुम अद्वैत दृष्टिवाले को शोक और मोह कैसे ?
Pujya Asharam Ji Bapu
नाशवान पदार्र्थों से अपना मन वापिस लाकर सदगुरु के चरणकमलों में लगाओ । गुरु सेवत ते नर धन्य यहाँ । तिनकुं नहीं दुःख यहाँ न वहाँ ।। Pujya Asharam Ji Bapu