Saturday, 21 April 2012

394_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

भला-बुरा वही देखता है
जिसके अन्दर भला-बुरा
है । दूसरों के शरीरों को
वही देखता है जो खुद
को शरीर मानता है

Pujya Asharam Ji Bapu

393_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

भौतिक पदार्थों को सत्य समझना,
उनमें आसक्ति रखना, दुख-दर्द व
चिंताओं को आमंत्रण देने के समान
है । अतः बाह्य नाम-रूप पर अपनी
शक्ति व समय को नष्ट करना यह
बड़ी गलती है ।
Pujya Asharam Ji Bapu

392_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिसकी पक्की निष्ठा है कि ङ्कमैं आत्मा हूँ...ङ्क
उसके लिये ऐसी कौन सी ग्रंथि है जो खुल
न सके? ऐसी कोई ताकत नहीं जो उसके
विरुद्ध जा सके ।

Pujya Asharam Ji Bapu

391_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

इस सम्पूर्ण जगत को पानी के बुलबुले
की तरह क्षणभंगुर जानकर तुम आत्मा
में स्थिर हो जाओ । तुम अद्वैत दृष्टिवाले
को शोक और मोह कैसे ?

Pujya Asharam Ji Bapu

390_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

नाशवान पदार्र्थों से अपना मन वापिस
लाकर सदगुरु के चरणकमलों में लगाओ ।
गुरु सेवत ते नर धन्य यहाँ ।
तिनकुं नहीं दुःख यहाँ न वहाँ ।।

 Pujya Asharam Ji Bapu

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