Saturday, 14 January 2012

141_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

समग्र संसार को जो अपना शरीर समझते हैं, प्रत्येक व्यक्ति को जो अपना आत्मस्वरूप समझते हैं, ऐसे ज्ञानी किससे अप्रसन्न होंगे ? उनके लिये विक्षेप कहाँ रहा ?
Pujya asharam ji bapu

140_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

These 12 positions are one set or round of one surya namaskar. We should do it 12 times or 12 rounds. Before starting each surya namaskar we should chant one mantra of surya and next time another one. Mantra we should chant in first position of every surya namaskar. So, we have 12 mantras for 12 surya namaskar.

यह मुद्राएं सूर्य नमस्कार की हैं। इन सभी मुद्राओं को क्रम से करने पर एक सूर्य नमस्कार पूर्ण होता है। हमें प्रतिदिन प्रातःकाल बारह बार सूर्य नमस्कार करने चाहिए। प्रत्येक सूर्य नमस्कार की पहली मुद्रा में सूर्य भगवान् का एक मंत्र उच्चारण करना चाहिए और अगले सूर्य नमस्कार को आरंभ करते हुए दूसरा मंत्र। बारह सूर्य नमस्कार करने के लिए नीचे सूर्य के बारह मन्त्र दिये गये हैं।
ॐ मित्राय नम:॥१॥
Om mitraay namah |1|

ॐ रवये नम:॥२॥
Om ravaye namah |2|

ॐ सूर्याय नम:॥३॥
Om suryay namah |3|

ॐ भानवे नम:॥
Om bhaanave namah |4|

ॐ खगाय नम:॥५॥
Om khagaay namah |5|

ॐ पूष्णे नम:॥६॥
Om pushne namah |6|

ॐ हिरण्यगर्भाय नम:॥७॥
Om hiranyagarbhay namah |7|

ॐ मरीचये नम:॥८॥
Om marichaye namah |8|

ॐ आदित्याय नम:॥९॥
Om aadityaay namah |9|

ॐ सवित्रे नम:॥१०॥
Om savitre namah |10|

ॐ अर्काय नम:॥११॥ 
Om arkaay namah |11|

ॐ भास्कराय नम:॥१२॥
Om bhaskaraay namah |12|

139_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सामवेद का छान्दोग्य उपनिषद् कहता है कि जिस आनंद को तू खोज रहा है वह आनंद तू ही है। तत्त्वमसि। वह तू है। तू पहले आनंदस्वरूप आत्मा था अथवा भविष्य में होगा ऐसी बात नहीं, अभी भी तू वही है। यह वेदवचन का आखिरी फैसला है। आध्यात्मिक जगत के जाने-माने शास्त्र, पुराण, बाइबिल, कुरान आदि सब बाद में हुए हैं और किसी न किसी व्यक्ति के द्वारा रचे गये हैं, जबकि वेद अनादि काल से हैं- तत्त्वमसि। वह तू है। उस आनंदस्वरूप सच्चिदानंदघन विश्वचैतन्य और तुझमें कोई भेद नहीं।
Pujya asharam ji bapu

138_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

दर्द दिल में छुपाकर मुस्कुराना सीख ले।
गम के पर्दे में खुशी के गीत गाना सीख ले।।
तू अगर चाहे तो तेरा गम खुशी हो जाएगा।
मुस्कुराकर गम के काँटों को जलाना सीख ले।।
दर्द का बार-बार चिन्तन मत करो, विक्षेप मत बढ़ाओ। विक्षेप बढ़े ऐसा न सोचो, विक्षेप मिटे ऐसा उपाय करो। विक्षेप मिटाने के लिए भगवान को प्यार करके 'हरि ॐ' तत् सत् और सब गपशप का मानसिक जप या स्मरण करो। 
Pujya asharam ji bapu

Friday, 13 January 2012

137_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सदगुरु मिटाते हैं। तू आनाकानी मत कर, अन्यथा तेरा परमार्थ का मार्ग लम्बा हो जायेगा। तू सहयोग कर। तू उनके चरणों में मिट जा और मालिक बन, सिर दे और सिरताज बन; अपना 'मैं' पना मिटा और मुर्शिद बन। तू अपना तुच्छ 'मैं' उनको दे दे और उनके सर्वस्व का मालिक बन जा। अपने नश्वर को ठोकर मार और उनसे शाश्वत का स्वर सुन। अपने तुच्छ जीवत्व को त्याग दे और शिवत्व में विश्राम कर।
Pujya asharam ji bapu 
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