Monday, 12 December 2011

43_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

निश्चय ही सम्पूर्ण जगत तुमसे अभिन्न है, इसलिए मत डरो। संसार को आत्मदृष्टि से देखने लग जाओ फिर देखो, विरोध कहाँ रहता है, कलह कहाँ रहता है, द्वेष कहाँ रहता है।
Pujya asharam ji bapu :-

Sunday, 11 December 2011

42_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

कर सत्संग अभी से प्यारे, नहीं तो फिर पछताना है।
खिला पिलाकर देह बढ़ायी, वह भी अगन जलाना है।
पड़ा रहेगा माल खजाना, छोड़ त्रिया सुत जाना है।
कर सत्संग....
नाम दीवाना दाम दीवाना, चाम दीवाना कोई।
धन्य धन्य जो राम दीवाना, बनो दीवाना सोई।।
नाम दीवाना नाम न पायो, दाम दीवाना दाम न पायो
चाम दीवाना चामपायो, जुग जुग में भटकायो।।
राम दीवाना राम समायो......
क्यों ठीक है न.... ? करोगे न हिम्मत ? कमर कसोगे ..... ? वीर बनोगे कि नहीं....? आखिरी सत्य तक पहुँचोगे कि नहीं? उठो.... उठो.... शाबाश.... हिम्मत करो। मंजिल पास में ही है। मंजिल दूर नहीं है। अटपटी जरूर है। झटपट समझ में नहीं आती परन्तु याज्ञवल्क्य, शुकदेव, अष्टावक्र जैसे कोई महापुरुष मिल जायें और समझ में आ जा तो जीवन और जन्म-मृत्यु की सारी खटपट मिट जाय।
आनन्द ! आनन्द !! आनन्द !!!
Pujya asharam ji bapu :-

41_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

प्रतिकूलता से भय मत करो। सदा शांत और निर्भय रहो। भयानक दृश्य (द्वैत) केवल स्वप्नमात्र है, डरो मत
 Pujya asharam ji bapu :-

40_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

बाहर कैसी भी घटना घटी हो, चाहे वह कितनी भी प्रतिकूल लगती हो, परन्तु तुम्हें उससे खिन्न होने की तनिक भी आवश्यकता नहीं, क्योंकि अन्ततोगत्वा होती वह तुम्हारे लाभ के लिए ही है। तुम यदि अपने-आपमें रहो तो तुम्हें मिला हुआ शाप भी तुम्हारे लिए वरदान का काम करेगा। अर्जुन को ऊर्वशी ने वर्ष भर नपुंसक रहने का शाप दिया था परन्तु वह भी अज्ञातवास के समय अर्जुन के लिए वरदान बन गया।
 Pujya asharam ji bapu :-

Saturday, 10 December 2011

39_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

तुम्हें जितना देखना चाहिए, जितना बोलना चाहिए, जितना सुनना चाहिए, जितना घूमना चाहिए, जितना समझना चाहिए वह सब हो गया। अब, जिससे बोला जाता है, सुना जाता है, समझा जाता है, उसी में डूब जाना ही तुम्हारा फर्ज है। यही तुम्हारी बुद्धिमत्त का कार्य है, अन्यथा तो जगत का देखना-सुनना खत्म न होगा.... स्वयं ही खत्म हो जायेंगे.....। इसलिए कृपा करके अब रुको। .....हाँ रुक जाओ.... बहुत हो गया। भटकने का अन्त कर दो।
 Pujya asharam ji bapu:-

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