सेवा संजीवनी
"ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
आत्मा से बाहर मत भटको । अपने ही केन्द्र में स्थिर रहो अन्यथा तुम गिर पड़ोगे । अपने आप में पूर्ण विश्वास रखो ।कोई चीज तुम्हें टस से मस नहीं कर सकती ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
याद रक्खों निश्चय ,श्रद्दा ,विश्वास और आत्मस्वरूप की स्मृति ही तुम्हारी आत्मा की अनन्त शक्ति को प्रगट करने वाले चार महा द्वार हैं । इनकी शरण ग्रहण करो इनका आश्रय लो ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
करोड़ों दुःख रूपी कीटाणु तुम्हारे आस-पास क्यों न घूमते रहें ,पर कुछ चिंता न करो । जब तक तुम्हारा मन कमजोर नही होता । तब तक उनकी हिम्मत नही कि वे तुम पर हमला करे । यह एक बड़ा सत्य है कि बल ही जीवन है और दुर्बलता ही मरण ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu