Friday, 7 August 2015

1302_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


तुच्छ हानि-लाभ पर आपका ध्यान इतना
क्यों रहता है जिससे अनंत आनन्दस्वरूप
आत्मा पर से ध्यान हट जाता है ।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Thursday, 6 August 2015

1301_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

नौनिहालों को पूज्य बापू जी का उदबोधन

अपनी उन्नति में बाधक, दुर्बलता के विचारों को जड़ से उखाड़ फेंको। उनके मूल पर ही कुठाराघात करो।  हलके संग का त्याग, सत्शास्त्रों का अध्ययन, सत्संग-श्रवण, ध्यान, सारस्वत्य मंत्र का जप – ये बुद्धिशक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी साधन है।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Wednesday, 5 August 2015

1300_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

हजार-हजार विघ्न-बाधाएँ आ जायें फिर भी जो संयम का, सदाचार का, सेवा का, ध्यान का, भगवान की भक्ति का रास्ता नहीं छोड़ता वह जीते जी मुक्तात्मा, महान आत्मा, परमात्मा के ज्ञान से सम्पन्न सिद्धात्मा जरूर हो जाता है और अपने कुल-खानदान का भी कल्याण कर लेता है। तुम ऐसे कुलदीपक बनना। ૐ....ૐ... बल.... हिम्मत... दृढ़ संकल्पशक्ति का विकास...... पवित्र आत्मशक्ति का विकास ......ૐ.....ૐ.....
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

1299_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः।
धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।

हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।"

"ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"


Friday, 12 June 2015

1298_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



प्रिय आत्मन ! न तेरा पहले जन्म था न वर्त्तमान में है और न आगे होगा। यदि क्षणमात्र के लिए अपने आसन से हटेगा, अपने आपको स्वरूप में स्थित न मानेगा, प्रमाद करेगा तो वही प्रमाद विस्तीर्ण जगत हो भासेगा।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...