हम
जो चाहते हैं
वह सब अपना होता
नहीं। जो अपना
होता है वह सब
भाता नहीं। जो
भाता है वह
सदा के लिए
टिकता नहीं।
-Pujya Asharam Ji Bapu
आध्यात्मिक
मार्ग में
देखा जाए तो
तुम्हारे शत्रु
वास्तव में
तुम्हारे
शत्रु नहीं
हैं। बाहर से
मित्र दिखते
हुए मित्र
तुम्हारे
गहरे शत्रु
हैं। वे तुम्हारा
समय खा जाते
हैं और
तुम्हारी
आध्यात्मिक
पूँजी चूस
लेते हैं,
तुमको भी पता
नहीं चलता।
उनको भी पता
नहीं होता कि
हम अपने मित्र
की आध्यात्मिक
पूँजी बरबाद
कर रहे है।
-Pujya Asharam Ji Bapu
मनुष्य जैसा सोचता है वैसा हो जाता है। मन कल्पतरू है। अतः सुषुप्त दिव्यता को, दिव्य साधना से जगाओ। अपने में दिव्य विचार भरो।
-Pujya Asharam Ji Bapu
किसी भी चीज़ को ईश्वर से अधिक मूल्यवान मत समझो |
-Pujya Asharam Ji Bapu
वे
ही महापुरूष
बड़ा काम कर
गये हैं,
उन्होंने ही
जगत का कल्याण
किया है
जिन्होंने
एकान्त-सेवन
किया है,
जिन्होंने
आत्म-विश्लेषण
किया है, जिन्होंने
तुच्छ
वस्तुओं का
आकर्षण
छोड़कर, तुच्छ
वस्तुओं की
चिन्ता
छोड़कर सत्य
वस्तु का
अनुसंधान
किया है।
-Pujya Asharam Ji Bapu