Sunday, 14 October 2012

833_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

साधक का लक्ष्य परमात्मा है और संसारी का लक्ष्य तुच्छ भोग है। संसारी की धारा चिन्ता के तरफ जा रही है और साधक की धारा चिन्तन के तरफ जा रही है।
 -Pujya asharam ji bapu

832_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



चित्त में क्षोभ हो जाना, चित्त का उत्तेजित हो जाना सबसे बड़ी हानि है। इससे बचने का सबसे सरल उपाय है कि उत्तेजना पैदा करनेवाले शब्दों को चिड़ियों की चहचहाट के समान समझो ।
-Pujya asharam ji bapu

831_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सबका मंगल, सबका भला हो

अगर आपके मन में किसी के लिए बुरे विचार आते हैं, तो सामनेवाले का अहित हो या हो परंतु आपका अंत:करण जरुर मलिन हो जायेगा फलस्वरूप मन में अशांति उत्पन्न होगी जो सब दु:खों का कारण है

यदि आपके मन में किसीके प्रति ईर्ष्या होती है, तो उसके पास जाकर कह दें कि मुझे माफ करें, आपको देखकर मुझे ईर्ष्या होती है आप भी प्रार्थना करें और मैं भी प्रार्थना करुँ ताकि आपके प्रति मेरी ईर्ष्या मिट जाय |”

कोई आपका कितना भी बुरा करना चाहे पर आप अगर सावधान होकर उसके लिए अच्छा ही सोचो और उसकी भलाई का ही चिन्तन करो तो कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा बुरा सोचनेवाले के विचार भी बदल जायेंगे। उसका दुष्प्रयोजन सफल नहीं हो पायेगा
-Pujya asharam ji bapu

Saturday, 13 October 2012

830_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

व्यवहार जगत के तूफान तो क्या, मौत का तूफान आये उससे भी टक्कर लेने का सामर्थ्य आ जाय इसका नाम है साक्षात्कार। इसका नाम है मनुष्य जीवन की सफलता।
 -Pujya asharam ji bapu

829_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सब काम करने से नहीं होते। कुछ काम ऐसे भी हैं जो करने से होते हैं, ध्यान ऐसा ही एक कार्य है। ध्यान का मतलब क्या ? ध्यान है डूबना ध्यान है आत्मनिरीक्षण करना… ‘हम कैसे हैं, यह देखना सत्संग भी उसीको फलता है जो ध्यान करता है
 -Pujya asharam ji bapu
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