लोग क्यों दुःखी हैं? क्योंकि अज्ञान के कारण वे अपना सत्य स्वरूप भूल गये हैं और अन्य लोग जैसा कहते हैं वैसा ही अपने को मान बैठते हैं।
- Pujya Asharam Ji Bapu
प्रत्येक
क्रिया, प्रत्येक
व्यवहार, प्रत्येक
प्राणी ब्रह्मस्वरूप
दिखे, यही सहज समाधि
है |
- Pujya Asharam Ji Bapu
आप स्वप्नदृष्टा हैं और यह जगत आपका ही स्वप्न है | बस, जिस क्षण यह ज्ञान हो जायेगा उसी क्षण आप मुक्त हो जाएँगे |
- Pujya Asharam Ji Bapu
वास्तविक शिक्षण का प्रारंभ तो तभी होता है जब मनुष्य सब प्रकार की सहायताओं से विमुख होकर अपने भीतर के अनन्त स्रोत की तरफ अग्रसर होता है |
- Pujya Asharam Ji Bapu
सुख-दुःख,
मान-अपमान,
हर्ष-शोक आदि
द्वन्द्व शरीर
के धर्म हैं।
जब तक शरीर है,
तब तक ये आते
जाते रहेंगे,
कभी कम तो कभी
अधिक होते
रहेंगे। उनके
आने पर तुम
व्याकुल मत
होना। तुम
पूर्ण आत्मा
हो, अविनाशी
हो और सुख-दुःख
आने जाने वाले
हैं।
- Pujya Asharam Ji Bapu