Tuesday, 5 June 2012

581_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

काहे एक बिना चित्त लाइये ?
ऊठत बैठत सोवत जागत, सदा सदा हरि ध्याइये।
हे भाई ! एक परमात्मा के अतिरिक्त अन्य किसी से क्यों चित्त लगाता है ? उठते-बैठते, सोते-जागते तुझे सदैव उसी का ध्यान करना चाहिए।

Monday, 4 June 2012

580_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

अपने अन्दर के परमेश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास करो | जनता एवं बहुमति को आप किसी प्रकार से संतुष्ट नहीं कर सकते | जब आपके आत्मदेवता प्रसन्न होंगे तो जनता आपसे अवश्य संतुष्ट होगी
Pujya Asharam Ji Bapu

579_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

शारीरिक, मानसिक, नैतिक व आध्यात्मिक ये सब पीड़ाएँ वेदान्त का अनुभव करने से तुरंत दूर होती हैं और…कोई आत्मनिष्ठ महापुरुष का संग मिल जाये तो वेदान्त का अनुभव करना कठिन कार्य नहीं है
Pujya Asharam Ji Bapu

Sunday, 3 June 2012

578_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जब-जब दुःख आ जाये तब समझ लो कि मैं भीतर वाले अन्तर्यामी ईश्वर से बिगाड़ रहा हूँ।सब दुःखों का कारण एक ही है। ईश्वर से जब तुम नाता बिगाड़ते हो तभी फटका लगता है..
Pujya Asharam Ji Bapu

577_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

स्वार्थपूर्वक कर्म करने से तो अल्प चीज मिलती है जबकि निःस्वार्थ होकर कर्म करने से अनन्त परमात्मा मिलता है।
Pujya Asharam Ji Bapu
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