Tuesday, 1 May 2012

439_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

यह सारा प्रपंच जो दिख रहा है वह सब माया मात्र है।
देखिये सुनिये गुनिये मन माँहि।
मोहमूल परमारथ नाँही।।

438_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

रूचि को पोसना नहीं है, निवृत्त करना है। रूचि निवृत्त हो गई तो काम बन गया, फिर ईश्वर दूर नहीं रहेगा।
जो लोग रूचि के अनुसार सेवा करना चाहते हैं, उनके जीवन मे बरकत नहीं आती। किन्तु जो आवश्यकता के अनुसार सेवा करते हैं, उनकी सेवा रूचि मिटाकर योग बन जाती है।

Pujya Asharam Ji Bapu

437_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जरा जरा-सी बात में डर रहे हैं? जरा जरा-सी बात में सिकुड़ रहे हैं? हो होकर क्या होगा? जो भी हो गया वह देख लिया। जो हो रहा है वह देख रहे हैं। जो होगा वह भी देखा जायेगा। मूँछ पर ताव देते हुए.... भगवान को प्यार करते हुए तुम आगे बढ़ते जाओ।
निर्भय..... निर्भय.... निर्भय.... निर्भय..... निर्भय.....।
Pujya Asharam Ji Bapu 

436_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

  किसी भी तरह समय बिताने के लिये मज़दूर की भांति काम मत करो | आनंद के लिये, उपयोगी कसरत समझकर, सुख, क्रीड़ा या मनोरंजक खेल समझकर एक कुलीन राजकुमार की भांति काम करो | दबे हुए, कुचले हुए दिल से कभी कोई काम हाथ में मत लो |
 Pujya Asharam Ji Bapu

445_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

   जैसे मछलियाँ जलनिधि में रहती हैं, पक्षी वायुमंडल में ही रहते हैं वैसे आप भी ज्ञानरूप प्रकाशपुंज में ही रहो, प्रकाश में चलो, प्रकाश में विचरो, प्रकाश में ही अपना अस्तित्व रखो | फिर देखो खाने-पीने का मजा, घूमने-फिरने का मजा, जीने-मरने का मजा |
 Pujya Asharam Ji Bapu 

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