Sunday, 22 April 2012

399_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

तुलसीदास जी कहते हैं-
घट में है सूझे नहीं, लानत ऐसे जिन्द।
तुलसी ऐसे जीव को, भयो मोतियाबिन्द।।
गहरा श्वास लेकर ॐ का गुंजन करो.... बार-बार गुंजन करो और आनन्दस्वरूप आत्मरस में डूबते जाओ। कोई विचार उठे तो विवेक जगाओ कि, मैं विचार नहीं हूँ। विचार उठ रहा है मुझ चैतन्यस्वरूप आत्मा से। एक विचार उठा.... लीन हो गया.. दूसरा विचार उठा... लीन हो गया। इन विचारों को देखने वाला मैं साक्षी आत्मा हूँ। दो विचारों के बीच में जो चित्त की प्रशांत अवस्था है वह आत्मा मैं हूँ। मुझे आत्मदर्शन की झलक मिल रही है....। ॐ आनंद.... खूब शांति। मन की चंचलता मिट रही है.... आनंदस्वरूप आत्मा में मैं विश्राम पा रहा हूँ।
 Pujya Asharam Ji Bapu

398_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

व्यर्थ के भोगों से बचने के लिए परोपकार करो और व्यर्थ चिन्तन से दूर रहने के लिए ब्रह्मचिन्तन करो। व्यर्थ के भोगों और व्यर्थ चिन्तन से बचे तो ब्रह्मचिन्तन करना नहीं पड़ेगा, वह स्वतः ही होने लगेगा
Pujya Asharam Ji Bapu

Saturday, 21 April 2012

397_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सदा ॐकार का गान करो । जब भय व चिन्ता के
विचार आयें तब किसी मस्त संत-फकीर, महात्मा
के सान्निध्य का स्मरण करो । जब निन्दा-प्रशंसा
के प्रसंग आयें तब महापुरुषों के जीवन का
अवलोकन करो

Pujya Asharam Ji Bapu

396_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

हरेक पदार्थ पर से अपने मोह को
हटा लो और एक सत्य पर, एक
तथ्य पर, अपने ईश्वर पर समग्र
ध्यान को केन्द्रित करो । तुरन्त
आपको आत्म-साक्षात्कार होगा ।

Pujya Asharam Ji Bapu

395_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

साधक को चाहिये कि अपने लक्ष्य
को दृष्टि में रखकर साधना-पथ पर
तीर की तरह सीधा चला जाये । न
इधर देखे न उधर । दृष्टि यदि
इधर-उधर जाती हो तो समझना कि
निष्ठा स्थिर नहीं है ।

Pujya Asharam Ji Bapu
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