Thursday, 2 February 2012

187_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

कृष्णं वन्दे जगद् गुरूम्।

186_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मुक्ति और बन्धन तन और मन को होते है। मैं तो सदा मुक्त आत्मा हूँ।

Wednesday, 1 February 2012

185_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

"..... ईश्वर किसी मत, पंथ, मजहब की दीवारों में सीमित नहीं है। वेदान्त की दृष्टि से वह प्राणिमात्र के हृदय में और अनन्त ब्रह्माण्डों में व्याप रहा है। केवल प्रतीति होने वाली मिथ्या वस्तुओं का आकर्षण कम होते ही साधक उस सदा प्राप्त ईश्वर को पा लेता है।"
Pujya asharam ji bapu 

184_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

".....मनुष्य जैसा सोचता है वैसा हो जाता है। मन कल्पतरू है। अतः सुषुप्त दिव्यता को, दिव्य साधना से जगाओ। अपने में दिव्य विचार भरो।"
Pujya asharam ji bapu 

183_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

"...... कर्म का बदला जन्म-जन्मान्तर लेकर भी चुकाना पड़ता है। अतः कर्म करने में सावधान.... और कर्म का फल भोगने में प्रसन्न....।"

Pujya asharam ji bapu 
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