मनसश्चेन्द्रियाणां च ह्यैक्राग्यं परमं तपः।
तज्जयः सर्व धर्मेभ्यः स धर्मः पर उच्यते।।
'मन और इन्द्रियों की एकाग्रता ही परम तप है। उनका जय सब धर्मों से महान है।'
(श्रीमद् आद्य शंकराचार्य)
तपः सु सर्वेषु एकाग्रता परं तपः।
तमाम प्रकार के धर्मों का अनुष्ठान करने से भी एकाग्रतारूपी धर्म, एकाग्रतारूपी तप बड़ा होता है।Pujya asharam ji bapu :-




