Sunday, 15 January 2012

146_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मनसश्चेन्द्रियाणां च ह्यैक्राग्यं परमं तपः।
तज्जयः सर्व धर्मेभ्यः स धर्मः पर उच्यते।।
'मन और इन्द्रियों की एकाग्रता ही परम तप है। उनका जय सब धर्मों से महान है।'
(श्रीमद् आद्य शंकराचार्य)
तपः सु सर्वेषु एकाग्रता परं तपः।
तमाम प्रकार के धर्मों का अनुष्ठान करने से भी एकाग्रतारूपी धर्म, एकाग्रतारूपी तप बड़ा होता है।
Pujya asharam ji bapu :-

145_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जैसे भगवान निर्वासनिक हैं, निर्भय हैं, आनन्दस्वरूप हैं, ऐसे तुम भी निर्वासनिक और निर्भय होकर आनन्द में रहो। यही उसकी महा पूजा है।
Pujya asharam ji bapu

144_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

चिन्ता, भय, शोक, व्यग्रता और व्यथा को दूर फेंक दो। उधर कतई ध्यान मत दो।
सारी शक्ति निर्भयता से प्राप्त होती है, इसलिए बिल्कुल निर्भय हो जाओ। फिर तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा।
Pujya asharam ji bapu

143_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

अपने मन में यह दृढ़  संकल्प करके साधनापथ पर आगे बढ़ो कि यह मेरा दुर्लभ शरीर न स्त्री-बच्चों के लिए है, न दुकान-मकान के लिए है और न ही ऐसी अन्य तुच्छ चीजों के संग्रह करने के लिए है। यह दुर्लभ शरीर आत्म ज्ञान प्राप्त करने के लिए है। मजाल है कि अन्य लोग इसके समय और सामर्थ्य को चूस लें और मैं अपने परम लक्ष्य आत्म-साक्षात्कार से वंचित रह जाऊँ? बाहर के नाते-रिश्तों को, बाहर के सांसारिक व्यवहार को उतना ही महत्त्व दो जहाँ तक कि वे साधना के मार्ग में विघ्न न बनें। साधना मेरा प्रमुख कर्त्तव्य है, बाकी सब कार्य गौण हैं – इस दृढ़ भावना के साथ अपने पथ पर बढ़ते जाओ।
Pujya asharam ji bapu

Saturday, 14 January 2012

142_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

ईश्वरः सर्वभूतानां हृदयेशेऽर्जुन तिष्ठति....
ईश्वर तो सर्वत्र है। उसको पाने की इच्छा रखने वाला दुर्लभ है। ईश्वर-प्राप्ति का मार्ग दिखानेवाले महापुरुषों का मिलना दुर्लभ है। ईश्वर दुर्लभ नहीं है। वह तो सर्वत्र है, सदा है। ईश्वर सुलभ है।
तस्याहं सुलभः पार्थ...।
'मैं तो सुलभ हूँ लेकिन मेरा साक्षात्कार कराने वाले महात्मा दुर्लभ हैं।'
बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते।
वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः।।
"बहुत जन्मों के अन्त के जन्म में तत्त्वज्ञान को प्राप्त पुरुष, सब कुछ वासुदेव ही है – इस प्रकार मुझको भजता है, वह महात्मा अत्यन्त दुर्लभ है।'
(भगवद् गीताः 7.19)
Pujya asharam ji bapu
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