Tuesday, 3 January 2012

101_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

करो हिम्मत......! मारो छलांग.....! कब तक गिड़गिड़ाते रहोगे ? हे भोले महेश ! तुम अपनी महिमा में जागो। कोई कठिन बात नहीं है। अपने साम्राज्य को संभालो। फिर तुम्हें संसार और संसार की उपलब्धियाँ, स्वर्ग और स्वर्ग के सुख तुम्हारे कृपाकांक्षी महसूस होंगे। तुम इतने महान हो। तुम्हारा यश वेद भी नहीं गा सकते। कब तक इस देह की कैद में पड़े रहोगे ?
ॐ.....! ॐ.....!! ॐ.......!!!
 Pujya asharam ji bapu

100_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिस शिष्य में गुरु के प्रति अनन्य भाव नहीं जगता वह शिष्य आवारा पशु के समान ही रह जाता है।
सब पुरुषार्थ गुरुकृपा प्राप्त करने के लिए किये जाते हैं। गुरुकृपा प्राप्त हो जाये तो उसे हजम करने का सामर्थ्य आये इसलिए पुरुषार्थ किया जाता है। दूध की शक्ति बढ़ाने के लिए कसरत नहीं की जाती लेकिन शक्तिमान दूध को हजम करने की योग्यता आये इसलिए कसरत की जाती है। दूध स्वयं पूर्ण है। उसी प्रकार गुरुकृपा अपने आप में पूर्ण है, सामर्थ्यवान है। भुक्ति और मुक्ति दोनों  देने के लिए वह समर्थ है। शेरनी के दूध के समान यह गुरुकृपा ऐसे वैसे पात्र को हजम नहीं होती। उसे हजम करने की योग्यता लाने के लिए साधक को सब प्रकार के साधन-भजन, जप-तप, अभ्यास-वैराग्य आदि पुरुषार्थ करने पड़ते हैं।

Pujya asharam ji bapu

99_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

गुरुदेव में मात्र परमात्मा की भावना ही नहीं, गुरुदेव परमात्म-स्वरूप हैं ही। यह एक ठोस सत्य है। यह वास्तविकता अनुभव करने की है। श्वेतश्वतर उपनिषद कहती हैः
यस्य देवे परा भक्तिर्यथा देवे तथा गुरौ।

Monday, 2 January 2012

98_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

दुनियाँ के सब लोग मिलकर तुम्हारे शरीर की सेवा में लग जाएँ फिर भी तुम्हारे स्व में कुछ बढ़ौती नहीं होगी। तुम्हारा विरोध में सारा विश्व उल्टा होकर टँग जाय फिर भी तुम्हारे स्व में कोई कटौती नहीं होगी, कोई घाटा नहीं होगा। ऐसा विलक्ष्ण तुम्हारा स्व है। इतने तुम स्वतन्त्र हो। संसार के सारे देशों के प्रेसिडेन्ट, प्रमुख, राष्ट्रपति, सरमुखत्यार, सुल्तान, प्राईम मिनिस्टर सब मिलकर एक आदमी की सेवा में लग जाएँ उसको सुखी करने में लग जाएँ फिर भी जब तक वह आदमी स्व का चिन्तन नहीं करता, स्व का विचार नहीं करता, आत्म विचार नहीं करता तब उसका दुर्भाग्य चालू रहता है। उपर्युक्त सब लोग मिलकर एक आदमी को सताने लग जाए और वह आदमी अगर आत्म-स्वरूप में सुप्रतिष्ठित है तो उसकी कोई हानि नहीं होती। उसके शरीर को चाहे काट दें या जला दें फिर भी वह आत्मवेत्ता अपने को कटा हुआ या जला हुआ मानकर दुःखी नहीं होगा। वह तो उस अनुभव पर खड़ा है जहाँ.....
नैनं छिदन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्याप न शोषयति मारूतः।।
'आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, आग जला नहीं सकती, जल भिगो नहीं सकता और वायु सुखा नहीं सकती।'
(भगवद् गीताः 2.23)

Pujya asharam ji bapu 

97_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

ईश्वर से अलग अपनी कुछ विशेषता बनाआगे तो वह विशेषता क्षीण हो जायगी। ब्रह्मज्ञान आपको ईश्वर से जोड़े रखता है। देहाध्यास आपको ईश्वर की विशालता से वंचित कर देता है।
Pujya asharam ji bapu
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