Tuesday, 30 July 2013

1152_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जब तक देहाभिमान की नालियों में पड़े रहोगे तब तक चिन्ताओं के बन्डल तुम्हारे सिर पर लदे रहेंगे। 

-Pujya Asharam Ji Bapu

Friday, 26 July 2013

1151_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सेवा करने वाला सामने वाले के गुणदोष देखेगा तो सेवा नहीं कर पायेगा। यज्ञार्थ कर्म करते जाओ। अपना कर्त्तव्य निभाते जाओ।
 -Pujya Asharam Ji Bapu

Thursday, 25 July 2013

श्री गुरु पादुका



**_** श्री गुरु पादुका **_**




नमो गुरुभ्यो गुरुपादुकाभ्यों |
नमः परेभ्यः परपादुकाभ्यः ||
आचार्य सिध्देश्वर पादुकाभ्यों
नमोस्तु लक्ष्मीपति पादुकाभ्यः ||1||

    सभी गुरुओं को नमस्कार, सभी गुरुओं की पादुकाओं को नमस्कार | श्री गुरुदेव जी के गुरुओं अथवा परगुरुओं एवं उनकी पादुकाओं को नमस्कार |
    
    आचार्यों एवं सिद्ध विद्याओं के स्वामी की पादुकाओं को नमस्कार | बारंबार श्री गुरुपादुकाओं को नमस्कार |
    

Sunday, 21 July 2013

गुरुपूर्णिमा की हार्दिक सुभकामनाएँ


बिखरी चेतना,बिखरी वृत्तियों को सुव्यवस्थित करने वाले सदगुरु जी के प्रति कृतज्ञता प्रकटाने का महापर्व गुरुपूर्णिमा
की हार्दिक शुभकामनाएँ

Saturday, 20 July 2013

गुरु पूर्णिमा महोत्सव की हार्दिक बधाई


गुरु पूर्णिमा महोत्सव की  हार्दिक बधाई

 “हे राम ! तुम्हारे तन, मन, धन, अपने सदगुरू के चरणों में समर्पित कर दो, जिन्होंने तुम्हें परम सुख या मोक्ष का मार्ग दिखाया है।”

-Shri Yoga Vashishtha Maharamayan


Friday, 19 July 2013

1150_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


तू मुझे अपना उर आँगन दे दे, मैं अमृत की वर्षा कर दूँ ।

            तुम गुरु को अपना उर-आँगन दे दो। अपनी मान्यताओं और अहं को हृदय से निकालकर गुरु से चरणों में अर्पण कर दो। गुरु उसी हृदय में सत्य-स्वरूप प्रभु का रस छलका देंगे। गुरु के द्वार पर अहं लेकर जानेवाला व्यक्ति गुरु के ज्ञान को पचा नही सकता, हरि के प्रेमरस को चख नहीं सकता।
            अपने संकल्प के अनुसार गुरु को मत चलाओ लेकिन गुरु के संकल्प में अपना संकल्प मिला दो तो बेडा़ पार हो जायेगा।

 -Pujya Asharam Ji Bapu

1149_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU





गुरु पूर्णिमा महोत्सव की  हार्दिक बधाई

Wednesday, 17 July 2013

1148_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



सामवेद का छान्दोग्य उपनिषद् कहता है कि जिस आनंद को तू खोज रहा है वह आनंद तू ही है। तत्त्वमसि। वह तू है। तू पहले आनंदस्वरूप आत्मा था अथवा भविष्य में होगा ऐसी बात नहीं, अभी भी तू वही है। यह वेदवचन का आखिरी फैसला है।
 -Pujya Asharam Ji Bapu

Monday, 15 July 2013

1147_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

अगर तुमने दस साल तक भी ब्रह्मनिष्ठ गुरु के आदेशानुसार साधना की हो, फिर भी यदि तुम्हारी श्रद्धा चली गयी तो वहीं पहुँच जाओगे जहाँ से दस साल पहले चले थे।

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