Saturday, 30 June 2012

643_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

कबीरा निन्दक ना मिलो पापी मिलो हजार।
एक निन्दक के माथे पर लाख पापीन को भार।।

642_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मनुष्य की वास्तविक अंतरात्मा इतनी महान् है कि जिसका वर्णन करते वेद भगवान भी 'नेति.... नेति.....' पुकार देते हैं। मानव का वास्तविक तत्त्व, वास्तविक स्वरूप ऐसा महान् है लेकिन भय ने, स्वार्थ ने, रजो-तमोगुण के प्रभाव ने उसे दीन-हीन बना दिया है।
Pujya Asharam Ji Bapu 

Friday, 29 June 2012

641_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिनके आगे प्रिय-अप्रिय, अनुकूल-प्रतिकूल, सुख-दुःख और भूत-भविष्य एक समान हैं ऐसे ज्ञानी, आत्मवेत्ता महापुरूष ही सच्चे धनवान हैं |
Pujya Asharam Ji Bapu

Thursday, 28 June 2012

640_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

प्रेम न खेत उपजे, प्रेम न हाट बिकाय,
राजा चहो , प्रजा चहो ,
शीश दिए ले जाए

639_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

   इस सम्पूर्ण जगत को पानी के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर जानकर तुम आत्मा में स्थिर हो जाओ | तुम अद्वैत दृष्टिवाले को शोक और मोह कैसे
 Pujya Asharam Ji Bapu

638_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

 वृति यदि आत्मस्वरूप में लीन होती है तो उसे सत्संग, स्वाध्याय या अन्य किसी भी काम के लिये बाहर नहीं लाना चहिये
 Pujya Asharam Ji Bapu

Wednesday, 27 June 2012

637_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

तू मुझे अपना उर आँगन दे दे, मैं अमृत की वर्षा कर दूँ ।

636_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सदगुरु जिसे मिल जाय सो ही धन्य है जन मन्य है।
सुरसिद्ध उसको पूजते ता सम न कोऊ अन्य है॥
अधिकारी हो गुरुदेव से उपदेश जो नर पाय है।
                                  भोला तरे संसार से नहीं गर्भ में फिर आय है॥

635_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

संसार की तमाम वस्तुऐं सुखद हों या भयानक, वास्तव में तो तुम्हारी प्रफ़ुलता और आनंद के लिये ही प्रकृति ने बनाई हैं | उनसे ड़रने से क्या लाभ ? तुम्हारी नादानी ही तुम्हें चक्कर में ड़ालती है | अन्यथा, तुम्हें नीचा दिखाने वाला कोई नहीं | पक्का निश्चय रखो कि यह जगत तुम्हारे किसी शत्रु ने नहीं बनाया | तुम्हारे ही आत्मदेव का यह सब विलास है
 Pujya Asharam Ji Bapu

Tuesday, 26 June 2012

634_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

महात्मा वही है जो चित्त को ड़ांवांड़ोल करनेवाले प्रसंग आयें फ़िर भी चित्त को वश में रखे, क्रोध और शोक को प्रविष्ट होने दे |
 Pujya Asharam Ji Bapu

633_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

ॐ हरी ॐ 

632_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

हे वत्स !
उठ.... ऊपर उठ।
प्रगति के सोपान एक के बाद एक
तय करता जा।
दृढ़ निश्चय कर कि
'अब अपना जीवन
दिव्यता की तरफ लाऊँगा।

Monday, 25 June 2012

631_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

प्रतीति में आसक्त न हो और प्राप्ति में टिक जाओ तो जीते जी मुक्त हो।
 Pujya Asharam Ji Bapu

630_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिसकी सत्ता से आँखे देखती हैं, जिसकी शक्ति से कान सुनते हैं, जिसकी शक्ति से दिल धड़कता है उस शक्तिदाता में अपनी बुद्धि को कभी-कभी विश्रान्ति देने का प्रयोग करो।
Pujya Asharam Ji Bapu

Sunday, 24 June 2012

629_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

 रोज प्रातः काल उठते ही ॐकार का गान करो | ऐसी भावना से चित्त को सराबोर कर दो कि : मैं शरीर नहीं हूँ | सब प्राणी, कीट, पतंग, गन्धर्व में मेरा ही आत्मा विलास कर रहा है | अरे, उनके रूप में मैं ही विलास कर रहा हूँ | ’ भैया !  हर रोज ऐसा अभ्यास करने से यह सिद्धांत हृदय में स्थिर हो जायेगा
 Pujya Asharam Ji Bapu

628_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

हरिहर आदिक जगत में पूज्य देव जो कोय
सदगुरु की पूजा किये सबकी पूजा होय

            कितने ही कर्म करो, कितनी ही उपासनाएँ करो, कितने ही व्रत और अनुष्ठान करो, कितना ही धन इकट्ठा कर लो और् कितना ही दुनिया का राज्य भोग लो लेकिन जब तक सदगुरु के दिल का राज्य तुम्हारे दिल तक नहीं पहुँचता, सदगुरुओं के दिल के खजाने तुम्हारे दिल तक नही उँडेले जाते, जब तक तुम्हारा दिल सदगुरुओं के दिल को झेलने के काबिल नहीं बनता, तब तक सब कर्म, उपासनाएँ, पूजाएँ अधुरी रह जाती हैं।
 Pujya Asharam Ji Bapu

627_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


माया दुस्तर है लेकिन मायापति की शरण जाने से माया तरना सुगम हो जाता है।
 Pujya Asharam Ji Bapu 

Saturday, 23 June 2012

626_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सत्वशुद्धिकरं नाम नाम ज्ञानप्रदं स्मृतम्।
मुमुक्षाणां मुक्तिप्रदं सर्वकामदम्।।
सचमुच, हरि का नाम मनुष्यों की शुद्धि करने वाला, ज्ञान प्रदान करने वाला, मुमुक्षुओं को मुक्ति देने वाला और इच्छुकों की सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाला है।

625_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मन को
फूलों की तरह
सुंदर रखो ताकि
भगवान की
पूजा में लग सके।

Pujya Asharam Ji Bapu 

624_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

संसार में बाह्य दीया बुझने से अँधेरा होता है और भीतर वासना का दीया बुझने से उजाला होता है। इसलिए वासना के दीये में इच्छाओं का तेल मत डालो। आप इच्छाओं को हटाते जाओ ताकि वासना का दीया बुझ जाय और ज्ञान का दीया दिख जाय।
 Pujya Asharam Ji Bapu

623_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

साधकों के लिए माला बड़ा महत्त्वपूर्ण साधन है। मंत्रजाप में माला बड़ी सहायक होती है। इसलिए समझदार साधक अपनी माला को प्राण जैसी प्रिय समझते हैं और गुप्त धन की भाँति उसकी सुरक्षा करते हैं। जपमाला की प्राण-प्रतिष्ठा पीपल के पत्ते पर रखकर उसकी पूजा इस मंत्र के साथ करें-
त्वं माले सर्वदेवानां प्रीतिदा शुभदा भव।
शिवं कुरुष्व मे भद्रे यशो वीर्यं च सर्वदा।।
अर्थात् 'हे माला ! तू सर्व देवों की प्रीति और शुभ फल देने वाली है। मुझे तू यश और बल दे तथा सर्वदा मेरा कल्याण कर।' इससे माला में वृत्ति जागृत हो जाती है और उसमें परमात्म-चेतना का आभास आ जाता है। माला को कपड़े से ढँके बिना या गौमुखी में रखे बिना जो जप किये जाते हैं वे फलते नहीं।
Pujya Asharam Ji Bapu

Friday, 22 June 2012

622_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिसका चित्त थोड़ी-थोड़ी बातों में उद्विग्न हो जाता है, घृणा, राग, द्वेष, हिंसा या तिरस्कार से भर जाता है वह अज्ञानी है। ज्ञानी का हृदय शान्त, शीतल, अद्वैत आत्मा में प्रतिष्ठित होता है।
 Pujya Asharam Ji Bapu

621_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

आज तक आपने जगत का जो कुछ जाना है, जो कुछ प्राप्त किया है.... आज के बाद जो जानोगे और प्राप्त करोगे, प्यारे भैया ! वह सब मृत्यु के एक ही झटके में छूट जायेगा, जाना अनजाना हो जायेगा, प्राप्ति अप्राप्ति में बदल जायेगी।
Pujya Asharam Ji Bapu 

620_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

भारत का आत्मज्ञान एक ऐसी कुंजी है जिससे सब विषयों के ताले खुल जाते हैं। संसार की ही नहीं, जन्म मृत्यु की समस्याएँ भी खत्म हो जाती हैं
Pujya Asharam Ji Bapu

619_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

श्री वशिष्ठ जी महाराज कहते हैं- 'हे राम जी! तृष्णावान के हृदय में संत के वचन नहीं ठहरते। तृष्णावान  से तो वृक्ष भी भय पाते हैं' इच्छा-वासना-तृष्णा आदमी की बुद्धि को दबा देती है
Pujya Asharam Ji Bapu 

Thursday, 21 June 2012

618_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

उमा कहूँ मैं अनुभव अपना।
                                                सत्य हरिभजन जगत सब सपना।।

617_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिस प्रकार धुआँ सफेद मकान को काला कर देता है, उसी प्रकार विषय-विकार एवं कुसंग नेक व्यक्ति का भी पतन कर देते है।
'सत्संग तारे, कुसंग डुबोवे।'
 Pujya Asharam Ji Bapu

Wednesday, 20 June 2012

616_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

चाहे शरीर रहे अथवा न रहे, जगत रहे अथवा न रहे, परंतु आत्मतत्त्व तो सदा एक-का-एक, ज्यों का त्यों है
 Pujya Asharam Ji Bapu

615_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


जैसी प्रीति संसार के पदार्थों में है, वैसी अगर आत्मज्ञान, आत्मध्यान, आत्मानंद में करें तो बेड़ा पार हो जाय। जगत के पदार्थों एवं वासना, काम, क्रोध आदि से प्रीति हटाकर आत्मा में लगायें तो तत्काल मोक्ष हो जाना आश्चर्य की बात नहीं है।
Pujya Asharam Ji Bapu

614_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जब हम ईश्वर से विमुख होते हैं तब हमें कोई मार्ग नहीं दिखता और घोर दुःख सहना पड़ता है | जब हम ईश्वर में तन्मय होते हैं तब योग्य उपाय, योग्य प्रवृति, योग्य प्रवाह अपने-आप हमारे हृदय में उठने लगता है |
 Pujya Asharam Ji Bapu

Tuesday, 19 June 2012

613_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कराण है । शुभ संकल्प और पवित्र कार्य करने से मन शुद्ध होता है, निर्मल होता है तथा मोक्ष मार्ग पर ले जाता है । यही मन अशुभ संकल्प और पापपूर्ण आचरण से अशुद्ध हो जाता है तथा जडता लाकर संसार के बन्धन में बांधता है । 

Pujya Asharam Ji Bapu

Monday, 18 June 2012

612_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

यदि सुख भोगना चाहते हो तो मन, बुद्धि और इन्द्रियों को अपने दास बनाओ। उनके अधीन होकर अपना अमूल्य जीवन नष्ट मत करो।
धिक्कार है उस अर्थ को, धिक्कार है उस कर्म को।
धिक्कार है उस काम को, धिक्कार है उस धर्म को।।
जिससे न होवे शांति, उस व्यापार में क्यों सक्त हो।
पुरूषार्थ अंतिम सिद्ध कर, मत भोग में आसक्त हो।।
इसलिए जो व्यक्ति सुख का इच्छुक है, उसे अपने मन को विषयों से हटाकर अपने वश में रखने का उद्यम करना चाहिए।

Pujya Asharam Ji Bapu 

611_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिसकी इन्द्रियाँ विषयों से हर प्रकार से निवृत्त रहती हैं, उसकी बुद्धि स्थिर, शांत और गंभीर रहती है। उसे ही सब सुख प्राप्त होते हैं। इन्द्रियों को स्वच्छन्द कर देने से अपनी शक्ति क्षीण हो जाती है और इसी निर्बलता के कारण मनुष्य को दुःख भोगना पड़ता है। 
Pujya Asharam Ji Bapu 

Sunday, 17 June 2012

610_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जब तक आप अपने अंतःकरण के अन्धकार को दूर करने के लिए कटिबद्ध नहीं होंगे तब तक तीन सौ तैंतीस करोड़ कृष्ण अवतार ले लें फिर भी आपको परम लाभ नहीं होगा..
 Pujya Asharam Ji Bapu

609_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिसको सत्संग में रूचि नहीं है उसको कुसंग में रूचि है। जो सत्संग नहीं करेगा वह कुकर्म जरूर करेगा। जो सदविचार नहीं करेगा वह कुविचार जरूर करेगा। जो राम को प्यार नहीं करेगा वह काम का जरूर गुलाम होगा।
इसलिए अपने हृदय में बैठे हुए आत्मा को प्यार करो, राम को प्यार करो।
Pujya Asharam Ji Bapu 

Saturday, 16 June 2012

608_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


आत्मज्ञान में प्रीति, निरन्तर आत्मविचार और सत्पुरूषों का सान्निध्य' – यही आत्म-साक्षात्कार की कुँजियाँ हैं
Pujya Asharam Ji Bapu

607_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

शोषणं पापपंकस्य दीपनं ज्ञानतेजसः |
गुरोः पादोदकं सम्यक् संसारार्णवतारकम् ||

श्री गुरुदेव का चरणामृत पापरूपी कीचड़ का सम्यक् शोषक है, ज्ञानतेज का सम्यक् उद्यीपक है और संसारसागर का सम्यक तारक है | (25)
 श्री गुरुगीता

Friday, 15 June 2012

606_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

प्रतीति में आसक्त न हो और प्राप्ति में टिक जाओ तो जीते जी मुक्त हो।
Pujya Asharam Ji Bapu

605_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

व्यवहार जगत के तूफान तो क्या, मौत का तूफान आये उससे भी टक्कर लेने का सामर्थ्य आ जाय इसका नाम है साक्षात्कार। इसका नाम है मनुष्य जीवन की सफलता।
 Pujya Asharam Ji Bapu

Thursday, 14 June 2012

604_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जागो.... उठो.... अपने भीतर सोये हुए निश्चयबल को जगाओ। सर्वदेश, सर्वकाल में सर्वोत्तम आत्मबल को अर्जित करो।
Pujya Asharam Ji Bapu

603_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत।
ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्।।
'कुल के हित के लिए एक व्यक्ति को त्याग दो। गाँव के हित के लिए कुल को त्याग दो। देश के हित के लिए गाँव का परित्याग कर दो और आत्मा के कल्याण के लिए सारे भूमंडल को त्याग दो।'

Wednesday, 13 June 2012

602_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मंगली बाधा निवारक मंत्र


                               '' अं रां अं  ''
  इस मंत्र को 108 बार जपने से क्रोध दूर होता है। जन्मकुण्डली में मंगली दोष होने से जिनके विवाह न हो रहे हों, वे 27 मंगलवार इसका 108 बार जप करते हुए व्रत रख के हनुमान जी पर सिंदूर का चोला चढ़ायें तो मंगल बाधा का क्षय होता है।

601_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

'श्री गुरु गीता' में भगवान शंकर भी भगवती पार्वती से कहते हैं – 
यस्य स्मरणमात्रेण ज्ञानमुत्पद्यते स्वयम्
सः एव सर्वसम्पत्तिः तस्मात्संपूजयेद् गुरुम् ।।

जिनके स्मरण मात्र से ज्ञान अपने आप प्रकट होने लगता है और वे ही सर्व (शमदमादि) सम्पदा रूप हैं, अतः श्री गुरुदेव की पूजा करनी चाहिए।

Tuesday, 12 June 2012

600_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सत्य के मार्ग अर्थात् ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग पर चलने वाले पथिकों के लिए विषय विकार एवं कुसंगरूपी भँवरों के पास न जाना ही श्रेयस्कर है।
अगर आग के नजदीक बैठोगे जाकर, उठोगे एक दिन कपड़े जलाकर।
माना कि दामन बचाते रहे तुम, मगर सेंक हरदम लाते रहे तुम।।

Pujya Asharam Ji Bapu 

599_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जो मनुष्य निष्काम कर्म करता है उसे आत्मा में प्रीति होती है, उसे संसार से वैराग्य उपजता है और वैराग्य की अग्नि से उसके सारे पाप तथा कुसंस्कार जल जाते हैं..
 ऐसे ही जब साधक वैराग्यवान होकर मन को वश में करता है तब उसे सदगुरू का थोड़ा सा उपदेश भी परमात्म पद में प्रतिष्ठित कर देता है।
Pujya Asharam Ji Bapu 

Monday, 11 June 2012

598_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जो एक से राग करता है, वह दूसरे से द्वेष करेगा। जो किसी से राग नहीं करता है, वह किसी से द्वेष भी नहीं करेगा। वह परम प्रेमी होता है। वह जीवन्मुक्त होता है
Pujya Asharam Ji Bapu

597_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सुख का दृश्य भी आयेगा और जायेगा तो दुःख का दृश्य भी आयेगा और जायेगा।तुम दृष्टा बनकर देखते रहो, अपनी महिमा में मस्त रहो।
Pujya Asharam Ji Bapu

Sunday, 10 June 2012

596_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

परमात्मा तब मिलता है जब परमात्मा की प्रीति और परमात्म-प्राप्त, भगवत्प्राप्त महापुरुषों का सत्संग, सान्निध्य मिलता है। उससे शाश्वत परमात्मा की प्राप्ति होती है और बाकी सब प्रतीति है। चाहे कितनी भी प्रतीति हो जाये आखिर कुछ नहीं। ऊँचे ऊँचे पदों पर पहुँच गये, विश्व का राज्य मिल गया लेकिन आँख बन्द हुई तो सब समाप्त।

Pujya Asharam Ji Bapu

595_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

कर्म का बदला जन्म-जन्मान्तर लेकर भी चुकाना पड़ता है। अतः कर्म करने में सावधान.... और कर्म का फल भोगने में प्रसन्न....।
Pujya Asharam Ji Bapu

594_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मनुष्य जैसा सोचता है वैसा हो जाता है। मन कल्पतरू है। अतः सुषुप्त दिव्यता को, दिव्य साधना से जगाओ। अपने में दिव्य विचार भरो।"
 Pujya Asharam Ji Bapu
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